शादी जिंदगी का अहम पड़ाव या लड़की वालों को लूटने का धंधा? #MinhazAsks
मैं अपने होश में, अपनी ज़िंदगी में जो देख रहा हूँ, उसकी गवाही दे सकता हूँ। पहले की बातें सुनी-सुनाई हैं, उन पर न तो कुछ कह सकता हूँ और न ही कुछ कर सकता हूँ। हाँ! मैं मिन्हाज़ —शादियों में लड़की वालों को लूटने के जो चलन चल पड़े हैं, उनके ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहा हूँ। इस लेख के ज़रिये मैं अपने ख़यालात, अपनी बेचैनी, अपने गुनाह, अपनी सच्चाई और अपनी “अप दीपो भव” आप सभी को सुनाना चाहता हूँ, ताकि मेरे सभी छोटे भाई और साथी भी उस बुराई के ख़िलाफ़ खड़े हो जाएँ, जिसका नाम है— दहेज़ । मेरे छोटे भाई अंजार की शादी की तस्वीर. दहेज़ के खिलाफ मैं जाग चुका था और अंजार ने भी मेरे मुहीम का साथ दिया. ये शादी बिना दहेज़ के हुई. आजकल लगन के समय शादी के नाम पर लड़की वालों को लूटने का धंधा चल रहा है. बाइक चाहिए, कार चाहिए, नगद कैश चाहिए! ऊपर से ढेर सारे बारातियों का पेट-पूजन भी कराओ. शादी तो खुद करो, लेकिन शौक लड़की वालों के पैसे से पुरे करो ? दहेज़ लिये जाने की चर्चा पर गर्व नहीं बल्कि शर्म महसूस करना चाहिए. शादी का सही तरीका क्या होना चाहिए? शादी का सही और सम्मानजनक तरीका बहुत सरल है— अपने घर के कुछ मुख्य लोगों ...