Posts

धर्म, सत्ता और लोकतंत्र: शंकराचार्य से शुरू हुआ असहमति को कुचलने का सिलसिला

Image
असहमति का अपराधीकरण: जब सत्ता, मीडिया और धर्म एक साथ लोकतंत्र के विरुद्ध खड़े हों जय हिंद। यह लेख किसी एक व्यक्ति, एक चैनल या किसी एक समुदाय के विरुद्ध नहीं है। यह लेख उस बेचैनी से जन्मा है, जो तब पैदा होती है जब सत्ता, मीडिया और तकनीक—तीनों मिलकर समाज की चेतना, संस्कृति और आत्मा को प्रभावित करने लगें। यह चिंता केवल हिंदुओं की नहीं है, न मुसलमानों की, न किसी एक धर्म या वर्ग की। यह चिंता भारत के लोकतांत्रिक, संवैधानिक और नैतिक चरित्र की है। मैं उस दौर में बड़ा हुआ हूँ जब दूरदर्शन पर मिले सुर मेरा तुम्हारा और एक रहे जैसे जैसे गीत चलते थे। वह समय जब सत्ता और समाज की साझा कोशिश लोगों को जोड़ने की होती थी, तोड़ने की नहीं। आज का समय इससे अलग है—और इसी फर्क को समझना इस लेख का उद्देश्य है। मैं कौन हूँ और अपनी बात रखने का अधिकार क्यों रखता हूँ मैं जन्म से एक भारतीय मुसलमान हूँ। लेकिन मैंने अपनी पूरी समझ और सार्वजनिक जीवन में हमेशा धर्म के आधार पर नफरत, भेदभाव और हिंसा का विरोध किया है। मैं अस्सलाम वालेकुम उतनी ही सहजता से बोलता हूँ, जितनी सहजता से जय सियावर रामचंद्र । मेरे लिए सियावर रामचं...

AAAS कोर कमिटी मीटिंग: रजिस्ट्रेशन, ज़िम्मेदारियाँ और अगला कदम

Image
आम आदमी अधिकार संगठन की कोर कमिटी मीटिंग में क्या तय हुआ? | 18 जनवरी 2026 यह लेख संगठन के इतिहास पर नहीं है। यह उस मीटिंग पर है, जिसमें तय किया गया कि अब आगे क्या किया जाएगा। 18 जनवरी 2026 को हुई कोर कमिटी मीटिंग में संगठन के रजिस्ट्रेशन और भविष्य की रणनीति पर स्पष्ट चर्चा हुई। मीटिंग की अध्यक्षता जहाँ रुपेश कुमार पासवान जी उर्फ़ रुपेश क्रातिकारी ने की वही मीटिंग के संयोजन की जिम्मेदारी नवल किशोर सिंह जी ने अपने कंधे पर ली थी। 📌 मीटिंग में लिए गए प्रमुख निर्णय ✔️संगठन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का निर्णय ✔️ संगठन का नाम “आम आदमी अधिकार संगठन” अंतिम रूप से स्वीकृत ✔️कोर कमिटी के पद और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करने पर सहमति ✔️RTI, ज्ञापन और कानूनी प्रक्रियाएँ संगठन के नाम से आगे बढ़ाने का लक्ष्य ✔️संगठन को दीर्घकालिक और सुरक्षित ढांचे में बदलने की दिशा तय

AAAS बोर्ड मेम्बर्स की मीटिंग: संगठन को धार देने की तैयारी

Image
लम्बी छलांग से पहले एक एक आखिरी बैक-स्टेप! तस्वीर 1: संगठन की कोर कमिटी की फाइनल ड्राफ्टिंग मेम्बर्स की मीटिंग- 18 जनवरी 2026 पटेल स्कूल महेशखूंट के समीप. मीटिंग समाप्ति के बाद की सामूहिक तस्वीर. 6 साल की ज़मीनी लड़ाई के बाद: क्यों अब आम आदमी अधिकार संगठन को कानूनी पहचान ज़रूरी हो गई (आम आदमी अधिकार संगठन को मजबूत क़ानूनी धार देने के लिए रजिस्ट्रेशन के मद्देनजर आज मीटिंग की पूरी कहानी.) जैसा की आप मिन्हाज़ को पढ़ते हुए अबतक जान ही चुके होंगे की व्यवस्था को ठीक करने के लिए व्यवस्था से लड़ना कितना मुश्किल है, हर कदम-कदम पर दलाल और भ्रष्ट अधिकारियों का बेरिकेड लगा हुआ है जिससे आम आदमी फस कर पीसता रहता है. ऐसे में अनेकता में एकता और एकता में बल जैसा कहावत ही काम आता है. संगठन में शक्ति ! अलग-अलग टैलेंट वाले लोग एक साथ मिलते हैं और और अपने अपने टैलेंट से एक मजबूत समूह बनाकर व्यवस्था से लड़ना ज्यादा आसान हो जाता है. 2019 में नौकरी छोड़कर गाँव लौटने के बाद से लोगो के हक़-ओ-हुकुक के लिए लड़ते लड़ते हमें समझ आई की बिना किसी संगठन के भ्रष्ट व्यवस्था ज्यादा नहीं डरती. जब कोई आम आदमी अकेला लड़ता है, तो ...

एजुकेशन देना तो तुमसे हो नहीं रहा हरामखोरों-जो देने की कोशिश कर रहे उनका गला रेत रहे हो ? #MinhazAsks

Image
जयहिंद, नमस्कार | आदाब | मैं मिन्हाज़! मिन्हाज़ भारती. साथियों मैं अपने जीवन के 40's में हूँ, जाहिरी तौर पर 90 के दशक में मैं एक यंग किड रहा होऊंगा. मेरी तरह आपमें से भी, जो भी उस 90 के दौर में यंग किड रे होंगे और दूरदर्शन देखा होगा, तो याद कीजिये जरा वो दौर, किस तरह टीवी पर हर आधे घंटे या कुछ नियमित अंतराल पर राष्ट्रीय एकता, साक्षरता, शिक्षा को लेकर जागरूक करने प्रेरित करने वाले गीत टीवी पर आया करते थे. दूरदर्शन का जिक्र इसीलिए क्योंकि ये वो दौर था जब हमारे पास आज की तरह अल्ट्रासुपरफ़ास्ट संचार सुचना और मनोरंजन के साधन नहीं थे.  था तो सिर्फ टीवी और टीवी पर दूरदर्शन. और वो भी हर घर में नहीं! तो भाग्यशाली ही थे वो लोग जिन घरों में टीवी था और उसके साथ बैटरी जिसपर बिना बिजली के बिना रूकावट टीवी चलता रह सके. तब "सब चंगा सी" का भोंपू नहीं बजता था बल्कि सब चंगा सी हो, इसके नित नए प्रयास हो ते रहते थे. देश में शांति, सद्भावना और शिक्षा का प्रसार हो, ना की पाखंड और अंधविश्वास का. और एक आज का दौर है, जब रोज शिक्षा, शैक्षणिक संस्थाओं पर हो रहे हमले का रोज नया रिकॉर्ड बनता घटना खब...

रॉयलएनफील्ड- तुमसे ये उम्मीद नहीं थी ! कस्टमर्स की जान की परवाह करो

Image
ये वो रॉयलएनफील्ड तो बिलकुल नहीं हो सकता  जिस प्रीमियम और सेफ्टी मेजर्स के लिए हमने इसका नाम सुना है ! रॉयल एनफील्ड चौधरी मोटर्स महेशखूंट आउटलेट का दृश्य – जहाँ सेफ्टी का मजाक उड़ाया जा रहा है। आज रॉयल एनफील्ड के महेशखूंट आउटलेट- चौधरी मोटर्स जाना हुआ, मेरी नयी बुलेट क्लासिक 350 का नंबर प्लेट आ गया था, उसके बाबत मुझे एजेंसी से कॉल आया था. तो आज दिन खुला, धुप निकली तो दोपहर को निकल चला और महेशखूंट NH-31 भागलपुर से खगड़िया की दिशा की तरफ वाले रोड पर बुलेट का आउटलेट है पहुंचा. अब कोई और बाइक एजेंसी हो तो एक पल को हम इगनोर कर दें, लेकिन बुलेट लोग एक ख़ास एक्सपीरियंस के लिए लेते हैं. उस एक्सपीरियंस के लिए हम कस्टमर्स pay करते हैं. क्या हो अगर एक्सपीरियंस के नाम पर आपको दशहत का सामना करना पड़ जाये ? Royal Enfield जैसे ब्रांड के महेशखूंट आउटलेट की ये दशा है! साफ़-साफ़ मेसेज है की जनता और कस्टमर अगर जागरूक ना हो तो सरकार हो या ब्रांड, वो आपको कूड़े पर ही रखेगी. मैं गिरते गिरते बचा हूँ. रॉयल एनफील्ड महेशखूंट आउटलेट के एंट्री रोड की जानलेवा हालत – NH-31 से उतरना मौत को दावत देने जैसा, संकड़ा और बे...

बेसिक नेसेसिटी को तरसता बिहार का गाँव: स्वच्छ पेयजल क्राइसिस

Image
गंगा -जो सांस्कृतिक महत्त्व के साथ साथ सभ्यता को बनाने से लेकर बचाए रखने के लिए तक जरूरी है, उस गंगा से हमारे गाँव बोरना का सम्बन्ध कितना घनिष्ठ है ये इससे ही समझा जा सकता है की ये गाँव साल के 3 महीने गंगा के बाढ़ से जलमग्न रहता है. यानी ये गाँव में आपको पानी ही पानी देख कर आँखों में सुकून लेने का शौक हो तो हमारे गाँव आकर आप 3 महीने इस शौक का लुत्फ़ उठा सकते हैं! बोरना - एक ऐसा गाँव जो की पानी-पानी में ही डूबा रहे 3 महीने, वो गाँव पीने के साफ़ पानी के लिए तरसता रहे क्या ये इस इल्जाम को साबित नहीं करता है की दुनिया के तरक्की कर रहे देशों के तुलना में हमारा भारत और भारत के गाँव कहाँ पर खड़े हैं? तस्वीर:1. बोरना गाँव के नवटोलिया में लगे नल-जल संयंत्र का मुआयना करता मैं मिन्हाज़ अपने साथियों के साथ. कागजी कारवाई से फ़िलहाल तो विभाग में हड़कंप जैसा दिख रहा है. तस्वीर में दिख रहा जल संयंत्र जिसको बोलचाल की भाषा में जल-मीनार कहा जाता है ये हमारे बोरना पंचायत के वार्ड नंबर 11 नवटोलिया गाँव को स्वच्छ पेयजल आपूर्ति करने के लिए सरकार द्वारा निर्मित किया गया तक़रीबन 2021-22 में. क्या आप मध्यप्रदेश में ...

कड़ाके की ठण्ड : जॉब कर रहे युवाओं के सहयोग से AAAS संग कम्बल वितरण

Image
पूस की रात ! हाड़ कंपाने वाली ठण्ड और कम्बल का सहारा. जॉब में लगे युवाओं का जज्बा आपको इस कहानी में पढ़ने को मिलेगी की कैसी पाक-साफ़ नियत हो तो लोग भी आगे आते हैं सहयोग करने के लिए ताकि समाज के जरूरतमंद लोगो तक राहत पहुंचाई जा सके. बोरना पंचायत के नवटोलिया गाँव में रुपेश पासवान जी के घर पर कम्बल वितरण का कार्यक्रम  दिसंबर 2025 गुजरते गुजरते पारा उस स्तर पर आ पहुंचा है जहाँ हमारे घर के बड़े बुजुर्गों के अन्दर एक अनकहा खौफ आ जाता है की हे उपरवाले किसी तरह ये ठण्ड गुजार लेने दे ताकि अपने नौनिहालों के साथ कुछ और दिन बिता सकूँ. बिहार जैसा लो इनकम स्टेट में बेसिक नेसेसिटी का भी इन्तेजाम कर पाना कई बुजुर्गों के लिए कितना मुश्किल काम है ये बात हर कोई जानता है. ऐसे में समाज में जो रोजाना कमा रहे हैं या फिक्स्ड इनकम वाली जॉब में हैं, उनके अन्दर अगर ऐसे लोगों की मदद करने की नियत पैदा हो जाए तो मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर दे सकता हूँ की इस गरीब राज्य में कोई भी ना भूखा मरे, ना प्यास से पानी की किल्लत से जान जाए और ना ही ठण्ड में कम्बल के अभाव से जान जाए. ऐसी ही एक कोशिश मिन्हाज़ ने की जिसमे टीम आस ...

जब बुनियाद ही जर्जर तो दुनिया से कैसे कदमताल मिलाया जा सकता है ? #GroundReality

Image
हमारे आम आदमी अधिकार संगठन के whatsapp group में अक्सर ये बहस छिड़ जाती है की क्या हुआ मिन्हाज़ तेरा वादा वो कसम वो इरादा ? मैं हर बार मुस्कुरा देता हूँ। इस देश में हर महीने कहीं न कहीं कोई न कोई चुनाव चल रहा होता है. अभी हम महीने भर पहले बिहार के विधानसभा चुनाव से निपटे ही हैं, अब कुछ महीने में बिहार के पंचायत लोकल इलेक्शन की आहट हो जाएगी.  बदलाव की हर एक बात इस देश में अंततोगत्वा चुनाव पर ही जाकर रूकती है. हमारे साथी सह मित्र नवल किशोर सिंह जी अभी वर्तमान में बौरना पंचायत के सरपंच हैं, और मैंने पुरे जी-जान से नवल जी को सरपंच बनाने के लिए 2021 के पंचायत चुनाव में लड़ाई लड़ी क्योंकि मैं जानता हूँ ये आदमी भले 100 परसेंट रिजल्ट ना दे सके मगर 60 प्रतिशत- 70 प्रतिशत तो दे ही जायेगा इतना मुझे अपने दोस्तों की काबिलियत पर भरोसा है.  क्यों मैंने नवल किशोर सिंह का साथ दिया बौरना गाँव में GN बाँध के मुद्दों पर ग्रामीणों के साथ रिपोर्ट बनाते हुए सरपंच नवल किशोर सिंह — जहाँ ज़मीन से जुड़ी राजनीति की असली तस्वीर दिखाई देती है। हमारे साथी और सह-मित्र नवल किशोर सिंह आज बौरना पंचायत के सरपंच हैं।...

सत्ता, नैतिकता और धर्म: शासन के लिए नैतिक आधार की तलाश

Image
धर्म और नैतिकता का अटूट संबंध राजनीति का सार सत्ता प्राप्त करना और उसका उपयोग करना है, जबकि धर्म का सार जीवन को एक नैतिक अनुशासन देना है। जब राजनीति नैतिकता से भटक जाती है, तो वह केवल शक्ति का एक नग्न प्रदर्शन बन जाती है, जो भ्रष्टाचार और अन्याय को जन्म देती है। धर्म, इस संदर्भ में, एक 'चेक एंड बैलेंस' प्रणाली के रूप में कार्य कर सकता है, जो सत्ता को जवाबदेह और नैतिक बनाए रखने की क्षमता रखता है। यह आलेख धर्म को चुनावी राजनीति के संकीर्ण दायरे से परे, शासन और सार्वजनिक जीवन के लिए एक नैतिक आधार के रूप में देखता है। धर्म (Dharma) की व्यापक अवधारणा भारतीय दर्शन में, 'धर्म' शब्द केवल 'Religion' (पूजा पद्धति) तक सीमित नहीं है। इसका अर्थ है 'कर्तव्य', 'नैतिकता', 'सही आचरण', और 'सार्वभौमिक नियम' जो ब्रह्मांड और समाज को धारण करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में, राजा (सत्ताधारी) का सबसे बड़ा धर्म 'राजधर्म' माना गया है, जिसका मूल तत्व प्रजा की सेवा और न्याय सुनिश्चित करना है। जब राजनीति इस 'राजधर्म' से विमुख हो जाती है, तो नैतिक स...