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कौन है मिन्हाज़ भारती?

मैं मिन्हाज़ हूँ. मिन्हाज़ अहमद ये नाम मेरे माँ-बाप का दिया हुआ है, समाज ने मुझे मेरे समाज की बुराई से लड़ने के जूनून मेरे जज्बे और जंग से प्रभावित होकर मुझे नया नाम दिया- मिन्हाज़ भारती!
मिन्हाज़ भारती जो भारत की, भारतीयता की, भारतीयता के खुशबु की बात करता है, भारतीयता के एसेंस को समझने की कोशिश करता है और जुझारू समाजसेवी होने के साथ साथ शिक्षण कार्य करते हुए बच्चों को skill and personality based अंग्रेजी शिक्षा देकर नयी पीढ़ी को समय के साथ कदमताल मिलाकर चलना सीखा रहा है.

कालचक्र में कुछ पीछे जाने पर-

कोई 1989/90 की बात होगी, मिन्हाज़ भारती, जो पहले सिर्फ मिन्हाज़ अहमद थे, उनके अब्बू मुख्तार अहमद अपने बड़े बेटे मिन्हाज़ को लेकर  बोरना से दिल्ली गए. मकसद था अपने परिवार के लिए ढंग का गुजर बसर और एहतर भविष्य की तलाश. वहां छोटी मोटी मजदूरी करते हुए मिन्हाज़ को स्कूल में दाखिला कराया. और मुख्तार खुद भी पटना यूनिवर्सिटी से साइंस ग्रेजुएट रहे थे तो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम मिलने लगा.
कुछ समय बाद दुबारा गाँव लौट अपने पुरे परिवार को लेकर दिल्ली चले गए ताकि सभी बच्चों को उम्दा तालीम मिल सके और गाँव के कंजर्वेटिव और बैकवर्ड वातावरण से बाहर निकल उनके बच्चे समय के साथ कदम मिला सकें.

एक बाप की तपस्या-

मुख्तार अहमद की मेहनत रंग लाई, और शायद मिन्हाज़ बोरना गाँव का पहला लड़का बना जिसने ना सिर्फ आधुनिक तालीम ली बल्कि कई सारे मल्टीनॅशनल कंपनी में जॉब किया. मिन्हाज़ के अलावा उनके छोटे भाई- अब्सार अहमद और अंजार अहमद भी MNC में जॉब करते हैं. सभी भाई आपस में जिस प्यार से और अलग अलग राज्यों में रहते हुए भी एकता से हैं उसकी मिसाल बोरना गाँव में हर घर में दी जाती है.
अपने दोनों छोटे भाई अब्सार अहमद और अंजार अहमद के साथ बीच में खड़े मिन्हाज़ और उनके अम्मी अब्बू
तस्वीर 1: फॅमिली फोटोग्राफ में अपने माँ-बाप और दोनों छोटे भाइयो के साथ बीच में खड़े मिन्हाज़ भारती.

यूं ही नहीं कोई मिन्हाज़ बन जाता है-अब्सार और अंजार जैसे भाई चाहिए होते हैं-

मिन्हाज़ जब 2019 में अपनी नौकरी को छोड़ कर गाँव लौटने की चर्चा अपने परिवार में जाहिर करते हैं तब जहाँ मिन्हाज़ के अम्मी-अब्बू, बीबी, बहनें, सबने भारी ऐतराज जताया और मिन्हाज को फटकार दुत्कार लगाई, उस वक़्त उनके दोनों भाई अपने बड़े भाई मिन्हाज़ के इस फैसले में साथ खड़े हुए. आज जब मिन्हाज़ गाँव में लोगों की समस्या सुलझाने में लगे हुए हैं और समाज को एक नए रस्ते की ओर ले जाने की कोशिश में लगे हुए हैं तब दोनों भाई- अब्सार और अन्ज़ार उनके साथ ना सिर्फ चट्टान की खड़े है बल्कि मिन्हाज़ की जरूरतों का भी ख्याल रखते हैं.
अब्सार और अंजार भी अपने बड़े भाई की तरह अपने समाज के लिए कुछ करने की चाह रखते हैं, लेकिन ये इन भाइयों के बीच के बेहतरीन कोर्डिनेशन का ही नतीजा है की समझदारी से काम लेते हुए दोनों छोटे भाई नौकरी करते हुए अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत रखते हैं और मिन्हाज़ को समाज में लड़ने के लिए हर तरह से आर्थिक और संसाधनों के जरिये अपना योगदान देते हैं.

शिक्षा तथा कैरियर-

Education-
  • 10th- 12th- Deewanchand Arya Senior Secondary School Lodhi Rd. 2000
  • B.Sc. फिजिक्स ओनर्स. जामिया यूनिवर्सिटी 2007
  • B.Tech Mechenical, University Of Calicut
  • PG Diploma in industrial and saftey management
Career & Jobs
  • IMB Daksh -  Gurugram, India
  • Convergys - Gurugram, India
  • Wipro Pvt. Ltd. - Noida, India
  • Excel - 
  • Pratibha Industries Ltd. - Delhi, India
  • Cholamandalam MS Risk Services Ltd. - Delhi, India 
    post- Saftey Consultant

  • Petron Engineering Construction Ltd. - Jamnagar, India
    post- Deputy Manager

  • Nasir S Alhajiri, Kuwait
    post- HSE manager.  2017 - 2019

जीवन का निर्णायक टर्निंग पॉइंट- 2019

2019 में कुवैत में नासिर एस अल्हाजिरी में नौकरी से रिजाइन देकर मिन्हाज़ स्वदेश वापस लौटे जहाँ दिल्ली में आम आदमी पार्टी से वालंटियर के तौर पर जुड़ गए और  समाज देश और लोगो के हालात का अपनी आँखों से साक्षात्कार करने लगे. यहाँ से मिन्हाज़ अहमद अब मिन्हाज़ भारती में बदलने लगा.
नागरिक अधिकारों के लिए कैसे लड़ा जाए इसकी ट्रेनिंग मिन्हाज़ की होने लगी सड़कों पर मोहल्लों मोहल्लों भटकते भटकते. 
मिन्हाज़ को आप पार्टी के वालंटियर के तौर पर पसीना बहाते हुए ये अहसास हुआ की इस बदहाली और जलालत भारी जिंदगी जीने को मजबूर दिल्ली के आम गरीब लोगों में से अधिकतर अपनी ही जुबां बोलने वाले हैं यानी बिहार के हैं.
और उन्हें याद आई की बचपन में जो अब्बू ने गाँव छोड़ दिल्ली का रुख किया था, तो अब वो गाँव की माटी उन्हें पुकार रही है.
बोरना की मिट्टी दर्द से कराहती हुई मिन्हाज़ को को वापस बोरना बुला रही थी.
और.......
मिन्हाज़ लौटा. अपना गाँव, अपनी मिट्टी को चूमा.
अब...
आगे की सारी कहानी minhazbharti.com पर बिना रुके जारी...
minhaz bharti first meeting after returning his native village borna on the issue of free quality education
2020 में गाँव में पहली मीटिंग-स्कूल के मुद्दे पर. माइक लिए लोगों से बात करते मिन्हाज़.


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