कड़ाके की ठण्ड : जॉब कर रहे युवाओं के सहयोग से AAAS संग कम्बल वितरण
पूस की रात ! हाड़ कंपाने वाली ठण्ड और कम्बल का सहारा. जॉब में लगे युवाओं का जज्बा आपको इस कहानी में पढ़ने को मिलेगी की कैसी पाक-साफ़ नियत हो तो लोग भी आगे आते हैं सहयोग करने के लिए ताकि समाज के जरूरतमंद लोगो तक राहत पहुंचाई जा सके.
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| बोरना पंचायत के नवटोलिया गाँव में रुपेश पासवान जी के घर पर कम्बल वितरण का कार्यक्रम |
दिसंबर 2025 गुजरते गुजरते पारा उस स्तर पर आ पहुंचा है जहाँ हमारे घर के बड़े बुजुर्गों के अन्दर एक अनकहा खौफ आ जाता है की हे उपरवाले किसी तरह ये ठण्ड गुजार लेने दे ताकि अपने नौनिहालों के साथ कुछ और दिन बिता सकूँ.
बिहार जैसा लो इनकम स्टेट में बेसिक नेसेसिटी का भी इन्तेजाम कर पाना कई बुजुर्गों के लिए कितना मुश्किल काम है ये बात हर कोई जानता है. ऐसे में समाज में जो रोजाना कमा रहे हैं या फिक्स्ड इनकम वाली जॉब में हैं, उनके अन्दर अगर ऐसे लोगों की मदद करने की नियत पैदा हो जाए तो मैं स्टाम्प पेपर पर लिख कर दे सकता हूँ की इस गरीब राज्य में कोई भी ना भूखा मरे, ना प्यास से पानी की किल्लत से जान जाए और ना ही ठण्ड में कम्बल के अभाव से जान जाए.
ऐसी ही एक कोशिश मिन्हाज़ ने की जिसमे टीम आस (आम आदमी अधिकार संगठन) से जुड़े युवाओं ने साथ दिया. ऐसा नहीं है की ये युवा यहाँ अपना काम धंधा छोड़ कर गाँव में रहकर समाजसेवा कर रहे हैं बल्कि ये वो साथी है जो कहीं न कहीं नौकरी कर रहे हैं और अपनी सैलरी से एक tiny अमाउंट जरूरतमंद लोगों के लिए देना चाहते हैं. संगठन ऐसे में एक bridge की भूमिका निभाता है. रुपेश पासवान जी ने whatsapp कॉलके जरिये मीटिंग की और मेसेज छोड़ा की क्या हम आपस में जिसके जो बूते हो छोटे-छोटे अमाउंट डोनेट कर अपने पंचायत के जरूरतमंद लोगो को मदद कर सकते हैं ??
नियत और इरादे साफ़ थे.
- गोपाल पंडित जी
- संजय यादव जी
- विक्रम यादव जी,
- नंदन यादव जी,
- सिंटू कुमार पटेल जी
- सुधीर रजक जी,
- रविश कुमार उर्फ़ गब्बर जी,


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