एजुकेशन देना तो तुमसे हो नहीं रहा हरामखोरों-जो देने की कोशिश कर रहे उनका गला रेत रहे हो ? #MinhazAsks
जयहिंद,
नमस्कार | आदाब |
मैं मिन्हाज़! मिन्हाज़ भारती.
साथियों मैं अपने जीवन के 40's में हूँ, जाहिरी तौर पर 90 के दशक में मैं एक यंग किड रहा होऊंगा.
मेरी तरह आपमें से भी, जो भी उस 90 के दौर में यंग किड रे होंगे और दूरदर्शन देखा होगा, तो याद कीजिये जरा वो दौर, किस तरह टीवी पर हर आधे घंटे या कुछ नियमित अंतराल पर राष्ट्रीय एकता, साक्षरता, शिक्षा को लेकर जागरूक करने प्रेरित करने वाले गीत टीवी पर आया करते थे.
दूरदर्शन का जिक्र इसीलिए क्योंकि ये वो दौर था जब हमारे पास आज की तरह अल्ट्रासुपरफ़ास्ट संचार सुचना और मनोरंजन के साधन नहीं थे.
था तो सिर्फ टीवी और टीवी पर दूरदर्शन. और वो भी हर घर में नहीं!
तो भाग्यशाली ही थे वो लोग जिन घरों में टीवी था और उसके साथ बैटरी जिसपर बिना बिजली के बिना रूकावट टीवी चलता रह सके.
तब "सब चंगा सी" का भोंपू नहीं बजता था बल्कि सब चंगा सी हो, इसके नित नए प्रयास हो ते रहते थे. देश में शांति, सद्भावना और शिक्षा का प्रसार हो, ना की पाखंड और अंधविश्वास का.
और एक आज का दौर है, जब रोज शिक्षा, शैक्षणिक संस्थाओं पर हो रहे हमले का रोज नया रिकॉर्ड बनता घटना खबर बनकर हमारे सामने आ रहा है.
मैं बात कर रहा हूँ मध्यप्रदेश के बैतूल जिले (Betul district) में हुई उस जघन्य अपराध की जिसमे निरंकुश भ्रष्टाचारी आदमखोर सरकार ने अब्दुल नईम के द्वारा अपने खर्चे से बनाये गए बच्चों के स्कूल को DEMOLISH कर दिया.
डेमोलिश शब्द ज्यादा चलन में है आजकल बजाय ध्वस्त के. तो उस स्कूल को ध्वस्त कर दिया गया जिसको abdul नईम ने नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को पढने का माहौल और मौका मिल सके इसके लिए अपने 20 से 30 लाख के खर्चे पर स्कूल बनाया.
मैंने एमपी के अपने कॉन्टेक्ट्स से इस विषय में और स्पष्ट जानकारी मुहैया कराने के लिए संपर्क किया. सोलंकी भाई, जो की केरला में मेरे जॉब के दौरान हमने साथ में ही काम किया था, अभी एमपी में ही जॉब कर रहे उन्होंने मुझे 24 घंटे में सबकुछ पुख्ता जानकारी के साथ बताने का वायदा किया. कल 15 जनवरी को सोलंकी जी ने पौने घंटे फोन पर बात करते हुए मुझे सब कुछ विस्तार से बताया. आइये आप भी सुनिए पूरी वारदात-
पूरी घटना का विवरण:
- गांव के रहने वाले अब्दुल नईम (Abdul Naeem) नाम के एक व्यक्ति ने अपनी जमीन पर और अपने खर्च से लगभग 20 लाख रुपये (कर्ज और परिवार की बचत से) एक प्राइवेट स्कूल भवन बनवाया था।
- यह स्कूल नर्सरी से 8वीं कक्षा तक के बच्चों के लिए था, क्योंकि गांव में सबसे नजदीकी स्कूल 5-6 किलोमीटर दूर है। गांव की आबादी लगभग 2000 है, जिसमें सिर्फ 3-4 मुस्लिम परिवार हैं (ज्यादातर आदिवासी और दलित समुदाय के लोग)।
- निर्माण चल रहा था और अभी क्लास शुरू भी नहीं हुई थीं। अब्दुल नईम ने 30 दिसंबर 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग में संचालन की अनुमति के लिए आवेदन भी जमा कर दिया था।
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विडियो 1: अब्दुल नईम का बयान सुनिए इस विडियो में
अब इसके आगे सुनिए क्या हुआ-
- तीन दिन पहले अफवाह फैलाई गई कि यह "अवैध मदरसा" (illegal madrasa) बन रहा है।
- स्थानीय प्रशासन (SDM, तहसीलदार) ने जांच की और शुरू में क्लीन चिट दी, साथ ही पंचायत से NOC (No Objection Certificate) लेने को कहा।
- 11 जनवरी को पंचायत ने नोटिस जारी किया, लेकिन गांववालों के विरोध के बाद 12 जनवरी को NOC भी जारी कर दिया गया।
- इसके बावजूद 13 जनवरी 2026 को SDM के निर्देश पर भवन का कुछ हिस्सा बुलडोजर से तोड़ दिया गया।
- अब्दुल नईम और ग्रामीणों का कहना है कि SDM ने कहा - "ऊपर से बहुत प्रेशर है, स्कूल तोड़ना पड़ेगा"।
- ग्रामीण बैतूल कलेक्टर कार्यालय गए, लेकिन रास्ते में पुलिस ने रोका और बाद में कलेक्टर ने जांच की बात कही, लेकिन तब तक तोड़फोड़ हो चुकी थी।
स्थानीय लोगो का अब्दुल नईम को साथ और सरकार पर आक्रोश-
जैसा की इस देश में व्यापक पैमाने पर ये ट्रेंड चल पड़ा है की कहीं भी किसी भी पाक काम में कोई मुस्लिम नाम या मुस्लिम लिंक आते हीं बड़े खतरनाक तरीके के प्रोपगंडा और अफवाहों की आंधी उड़ाई जाने लगती है.
और नतीजा "सबकुछ तबाह कर डालो और सुकून का सांस लो" का !!
#MInhazAsks : मिन्हाज़ के सवाल-
- अभी इस साल के शुरू में ही हमने जम्मू कश्मीर का मामला देखा जहाँ मेडिकल कॉलेज शट डाउन कर दिया गया, वहां भी इसी तरह का प्रोपगंडा फैलाया गया की मुस्लिम स्टूडेंट्स इस कॉलेज में ज्यादा क्यों ?
- और इसके बंद होने के आदेश के बाद हुडदंगी कट्टरपंथी संगठन के असामाजिक तत्वों ने जश्न मनाया पटाखे फोड़े, लिटरली ?
- आई मीन की लिटरली ये वही देश है जिसका प्रचारतंत्र 24 घंटे विश्वगुरु विश्वगुरु का ढोल बजाता रहता है?
- अब्दुल नईम एक मुस्लिम है और अगर वो मदरसा चला रहा था तो इसका विरोध करने वाले कोई भी स्थानीय लोग क्यों नहीं हैं ?
दो हजार की आबादी वाले इस गाँव- ढाबा गांव (Dhaba village), भैंसदेही तहसील में शासन द्वारा क्यों नहीं स्कूल खोली गयी की एक आम नागरिक अपने बूते अपने जमापूंजी और कर्ज पर 20 लाख रूपये से भी अधिक इकठ्ठा कर स्कूल खोलने पर प्रेरित या विवश (जो नाम दे लो) हुआ ?
इस घटना को अलग अलग मीडिया हाउसेस ने अपने web संस्करण में कवर किया है, जिसमे से कुछ का लिंक मैं सन्दर्भ के तौर पर यहाँ जोड़ रहा हूँ-
- abp न्यूज़ ने इस खबर को इस शीर्षक के साथ कवर किया है-बैतूल: स्कूल पर चला बुलडोजर, मदरसे की अफवाह और पंचायत के दोहरे रवैये ने मामले को उलझाया
- Indian Express की खबर का शीर्षक- He set out to build a school for his village in Madhya Pradesh. What followed: Madrasa rumours and demolition
- News18 के अंग्रेजी web संस्करण पर छपी ये खबर इस शीर्षक के साथ- Rumour Of ‘Illegal Madrasa’ Triggers Demolition Of School In Madhya Pradesh Village
मिन्हाज़ का सवाल इस देश की सरकार और इस देश की न्यायपालिका से-
- सम्मानीय चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया साहब, क्या ये शिक्षा के मूल संवैधानिक अधिकारों पर हमला नहीं है ? क्या आपको नहीं लगता है की इस देश में जो लगातार संविधान की मूल भावना पर हमला किया जा रहा है, हम नागरिको को ये दिख रहा है साफ़ साफ़ की संविधान का सुप्रीम कस्टोडियन होने के बावजूद आपके तरफ से लगातार इन मामलों पर आँख फेर कर अपनी सहमती दी जा रही है?
- सम्मानीय चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया साहब, सवाल दो हजार बच्चों से उनके शिक्षा के छीन लिए गए अधिकार का है. स्वतः संज्ञान जैसी ताकत आपने क्या सिर्फ उन मामलों के लिए ही राखी हुई है जिसमे हम जैसा कोई नागरिक आपकी हरकतों को क्रिटिसाइज़ करे, तो अपने ईगो को शांत करने के लिए आप उसका इस्तेमाल करें?
- आदरणीय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, विश्वगुरु बनने की क्या शर्ते हैं ? यही की पहले सरकारी स्कूलों को तबाह कर दो बंद कर दो फिर कोई नागरिक अपने जमाखर्च पर स्कूल खोले तो उसको ध्वस्त कर दो ??
- आदरणीय भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, जब दुनिया के अगली कतार के देश लगातार अपने देश के बच्चों को उन्नत शिक्षा के लिए अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर रहे हैं, चीन अपने बच्चों को आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की पीढ़ी के लिए शिक्षित कर रहा है, तब आप कम से कम स्कूलों पर कॉलेजों पर हो रहे हमले पर एक कड़ा सन्देश भी नहीं दे सकते ??
- आदरणीय नरेंद्र मोदी जी, क्या ऐसे मानवता के प्रति हमलों पर आपकी चुप्पी को हम नागरिक आपकी सहमती मानें ??
याद रखिये, भले आप आज जबाब ना दें, लेकिन इतिहास सब याद रखता है और तारीखें सब दर्ज रखती हैं. और कोई दर्ज ना भी करे तो कम से कम मिन्हाज़ अपना फर्ज निभा रहा है और हर एक वाकये को लिख रहा है.
इन्कलाब जिंदाबाद!




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