खगड़िया ज़िला के संघर्षशील social worker मिन्हाज़ भारती का official blog।
गांधीजी से प्रेरित होकर विदेश की लग्ज़री सैलरी और जीवन छोड़कर गाँव बोरना लौटे।
अब सिस्टम में भ्रष्टाचार के विरुद्ध और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर से प्रेरित होकर सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष ही मेरी जीवन-दिशा है।
यहाँ मैं अपने विचार, अपने संघर्ष, अपनी लड़ाई और अपने शिक्षण–अध्यापन से जुड़े विषयों पर लिखता हूँ।
मेरी लेखनी की लाइब्रेरी है मेरा ब्लॉग — मैं मिन्हाज़।
रॉयलएनफील्ड- तुमसे ये उम्मीद नहीं थी ! कस्टमर्स की जान की परवाह करो
ये वो रॉयलएनफील्ड तो बिलकुल नहीं हो सकता जिस प्रीमियम और सेफ्टी मेजर्स के लिए हमने इसका नाम सुना है !
रॉयल एनफील्ड चौधरी मोटर्स महेशखूंट आउटलेट का दृश्य – जहाँ सेफ्टी का मजाक उड़ाया जा रहा है।
आज रॉयल एनफील्ड के महेशखूंट आउटलेट- चौधरी मोटर्स जाना हुआ, मेरी नयी बुलेट क्लासिक 350 का नंबर प्लेट आ गया था, उसके बाबत मुझे एजेंसी से कॉल आया था. तो आज दिन खुला, धुप निकली तो दोपहर को निकल चला और महेशखूंट NH-31 भागलपुर से खगड़िया की दिशा की तरफ वाले रोड पर बुलेट का आउटलेट है पहुंचा. अब कोई और बाइक एजेंसी हो तो एक पल को हम इगनोर कर दें, लेकिन बुलेट लोग एक ख़ास एक्सपीरियंस के लिए लेते हैं.
उस एक्सपीरियंस के लिए हम कस्टमर्स pay करते हैं.
क्या हो अगर एक्सपीरियंस के नाम पर आपको दशहत का सामना करना पड़ जाये ?
Royal Enfield जैसे ब्रांड के महेशखूंट आउटलेट की ये दशा है! साफ़-साफ़ मेसेज है की जनता और कस्टमर अगर जागरूक ना हो तो सरकार हो या ब्रांड, वो आपको कूड़े पर ही रखेगी. मैं गिरते गिरते बचा हूँ. रॉयल एनफील्ड महेशखूंट आउटलेट के एंट्री रोड की जानलेवा हालत – NH-31 से उतरना मौत को दावत देने जैसा, संकड़ा और बेतरतीब गड्ढों से भरा पाथ। (GPS: 25.470259, 86.630281, 15 जनवरी 2026)
NH से नीचे आउटलेट पे उतरते ही ऐसा लगता है आप रॉयल एनफील्ड के आउटलेट पर नहीं बल्कि किसी सस्ते गेराज पर उतर रहे हैं. मेरे जैसे नए बुलेट राइडर के लिए यहाँ एनएच से नीचे उतरना मौत को दावत देने के जैसा है, जरा सा बैलेंस डगमगाया की जान बच भी जाये एक बार को मगर उसके बाद आप जिंदगी में दुबारा बुलेट तो क्या कोई भी बाइक चलाने के काबिल नहीं बचेंगे.
मैंने उसी समय on स्पॉट विडियो बनाकर @royalenfield और इसकी पैरेंट कंपनी आयशर मोटर्स को टैग करते हुए सिक्यूरिटी मेजर्स पर और कंपनी के स्क्रूटनी मेजर्स पर x (ट्विटर) पर सवाल उठाये.
X पर मेरा पोस्ट जहां मैंने रॉयल एनफील्ड को टैग करके महेशखूंट आउटलेट के सेफ्टी इश्यूज एक्सपोज किए – कंपनी से तुरंत एक्शन की मांग
आइये थोड़ी और डिटेल डेप्थ एनालिसिस से समझते हैं की वो कौन सी वजहें ज्सिके कारण इस इस्सू को मैं बहुत ज्यादा गंभीर और तत्काल करवाई करने लायक मानता हूँ-
रॉयल एनफील्ड महेशखूंट आउटलेट (चौधरी मोटर्स) NH-31 के बिलकुल सटे होने के बावजूद, उससे नीचे उतरने वाला रास्ता बेहद संकड़ा, असमान और खतरनाक है। वाइड एंगल शॉट्स में रोड की चौड़ाई मुश्किल से 2-3 मीटर लगती है, जो एक भारी बाइक जैसे बुलेट क्लासिक 350 (जिसका वजन करीब 190-200 किलो है) के लिए पर्याप्त नहीं। रास्ता NH से अचानक नीचे की तरफ ढलान वाला है – लगभग 30-45 डिग्री का स्लोप, बिना किसी स्मूथ ट्रांजिशन या लेवलिंग के। किनारों पर घास, कचरा, पत्थर और गड्ढे बिखरे हैं, जो बैलेंस बिगाड़ सकते हैं।
NH-31 से रॉयल एनफील्ड महेशखूंट आउटलेट तक का संकड़ा और असुरक्षित रास्ता – गड्ढे, कचरा और ढलान से भरा, नए बुलेट राइडर्स के लिए मौत का फंदा। (GPS: 25.470259, 86.630281, 15 जनवरी 2026)
नए राइडर जैसे मेरे लिए यह मौत का फंदा है: जरा सा हिलना-डुलना या स्पीड कंट्रोल गड़बड़ाया, तो बाइक पलट जाएगी। क्योंकि रोड इतनी संकड़ी है कि गिरते वक्त पैर जमीन पर नहीं टिक पाएंगे – कोई जगह ही नहीं बचेगी सपोर्ट लेने की। बुलेट की हैवी बॉडी सीधे राइडर पर चढ़ जाएगी, जिससे गंभीर चोटें (जैसे फ्रैक्चर, हेड इंजरी या स्पाइनल डैमेज) लगभग तय हैं। अगर हाई स्पीड से NH पर ट्रैफिक हो (जैसे ट्रक या कार), तो गिरावट सीधे हाइवे पर फेंक सकती है, जो फेटल एक्सीडेंट का कारण बनेगी। दूर से ली तस्वीरों में दिखता है कि रोड पर कोई साइनेज, स्पीड ब्रेकर या गार्ड रेल नहीं – सिर्फ कच्ची मिट्टी और मलबा। "Pure Celebration Pure Motorcycling" गेट के नीचे एम्बुलेंस की मौजूदगी खुद ब खुद खतरे की घंटी बजा रही है, जैसे पहले से हादसों की तैयारी हो। कंपनी को ऐसे आउटलेट्स की स्क्रूटनी करनी चाहिए, वरना कस्टमर्स का "एक्सपीरियंस" अस्पताल में बदल जाएगा!
सवाल ये है की आखिर ये संस्थाए ऐसे क्यों डील करती हैं जैसे हम कोई पहाड़ों गुफाओं में रहने वाली पिछड़ी कम्युनिटी हों की चालों भाई जो कूड़ा कचरा करकट है दाल दो, उझल दो, क्या जरूरत है साफ़ करने की ? क्या जरुरत है सफाई रखने की क्या जरुरत है सेफ्टी नोर्म्स पर बहुत जिम्मेदारी से नजर रखने की.
वहां आउटलेट पर मौजूद लड़कों से जो की शायद स्टाफ ही थे जब सवाल पूछता हू की ये सब कब से है किसकी जिम्मेदारी है तो लड़के इधर उधर होने लगे, कहने लगे की सर मालिक से बात कर लीजिये, मेनेजर से बात कर लीजिये वगैरह वगैरह !!
मैं आज अपने ऑफिसियल ब्लॉग पर सीधा कंपनी से सवाल कर रहा हूँ की क्या आपके सेफ्टी ऑफिसर्स को आप अपने आउटलेट्स पर सुरक्षा मानकों की निगरानी करने भेजते हैं ??
क्या पैरामीटर आपने तय कर रखे हैं हम ग्राहकों की सेफ्टी के लिए ??
रॉयल एनफील्ड की सेफ्टी पॉलिसी: क्या कहती है कंपनी?
रॉयल एनफील्ड की ऑफिशियल वेबसाइट पर सेफ्टी सेक्शन में राइडिंग टिप्स और वॉर्निंग साइन्स के बारे में तो बात है, लेकिन डीलर आउटलेट्स की सेफ्टी या स्क्रूटनी पर कोई स्पेसिफिक गाइडलाइंस नहीं मिलतीं। वे रिकॉल और सर्विस कैंपेन चलाते हैं, जैसे कि सेफ्टी रिलेटेड इश्यूज के लिए, लेकिन ग्राउंड लेवल पर डीलर्स की मॉनिटरिंग का कोई जिक्र नहीं। क्या कंपनी के पास कोई सेफ्टी ऑफिसर्स की टीम है जो रेगुलर इंस्पेक्शन करती है? या बस डीलर्स को फ्री हैंड दिया जाता है?
सवाल पूछा जायेगा, और सवाल पूछना जारी रहेगा. क्योंकि इस सिस्टम को सुधारने का बस यही एक रास्ता है की सवाल पूछना जारी रखो. किस बात का ब्रांड वैल्यू अगर मैं अपनी बाइक की सर्विसिंग कराने बुलेट के शोरुम जाऊं और नेशनल हाइवे से इनके शोरुम उतरते खतरनाक ढलान पर मैं अपनी जिंदगी का कोई नुक्सान करवा लूं ?
रॉयल एनफील्ड-आपको जबाब देना होगा!
और सिर्फ जबाब नहीं, यहाँ आकर आपको अपनी सेफ्टी मेजर्स को एक मानक बनाकर दिखाना होगा. जब तक ऐसा नहीं होगा, मिन्हाज़ का सवाल पूछना जारी रहेगा!
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