AAAS बोर्ड मेम्बर्स की मीटिंग: संगठन को धार देने की तैयारी

लम्बी छलांग से पहले एक एक आखिरी बैक-स्टेप!

aaas ngo core committee pre registration meeting held on 18th january 2026
तस्वीर 1: संगठन की कोर कमिटी की फाइनल ड्राफ्टिंग मेम्बर्स की मीटिंग- 18 जनवरी 2026 पटेल स्कूल महेशखूंट के समीप. मीटिंग समाप्ति के बाद की सामूहिक तस्वीर.

6 साल की ज़मीनी लड़ाई के बाद: क्यों अब आम आदमी अधिकार संगठन को कानूनी पहचान ज़रूरी हो गई
(आम आदमी अधिकार संगठन को मजबूत क़ानूनी धार देने के लिए रजिस्ट्रेशन के मद्देनजर आज मीटिंग की पूरी कहानी.)

जैसा की आप मिन्हाज़ को पढ़ते हुए अबतक जान ही चुके होंगे की व्यवस्था को ठीक करने के लिए व्यवस्था से लड़ना कितना मुश्किल है, हर कदम-कदम पर दलाल और भ्रष्ट अधिकारियों का बेरिकेड लगा हुआ है जिससे आम आदमी फस कर पीसता रहता है.
ऐसे में अनेकता में एकता और एकता में बल जैसा कहावत ही काम आता है. संगठन में शक्ति !
अलग-अलग टैलेंट वाले लोग एक साथ मिलते हैं और और अपने अपने टैलेंट से एक मजबूत समूह बनाकर व्यवस्था से लड़ना ज्यादा आसान हो जाता है.

2019 में नौकरी छोड़कर गाँव लौटने के बाद से लोगो के हक़-ओ-हुकुक के लिए लड़ते लड़ते हमें समझ आई की बिना किसी संगठन के भ्रष्ट व्यवस्था ज्यादा नहीं डरती.
जब कोई आम आदमी अकेला लड़ता है, तो व्यवस्था मुस्कुरा देती है।
लेकिन जब वही आम आदमी संगठन बनाकर खड़ा हो जाए — तब व्यवस्था घबराने लगती है।
जुलाई 2020 की एक तस्वीर जिसमे कोरोना के पहली वेव में लॉकडाउन में लोगों को रहत पहुंचाने के मसकद से पहली बार रुपेश और मिन्हाज़ के नेतृत्व टीम के रूप में इकठ्ठा हुआ.
तस्वीर 2: जुलाई 2020 कोरोना लॉकडाउन- मिन्हाज़ को मिला रुपेश और बन गयी टीम. शुरू हुआ लॉकडाउन में लोगो को रहत पहुँचाने का सामाजिक कार्य
आम आदमी अधिकार संगठन का बीज इसी ग्रुप फोटो में पड़ा, levis की टीशर्ट में मैं मिन्हाज़!

तो हमने आपस में मिलकर संगठन बनाया. अलग अलग समय अलग-अलग नाम हमने रखा क्योंकि कोई एक स्पष्ट प्रारूप हमारे सामने नहीं था, हम सीख रहे थे.
सीखते सीखते आखिर में हमने ये नाम तय किया-
"आम आदमी अधिकार संगठन".
अब हमारे सामने दशा भी तय थी और दिशा भी तय हो चूका था. ये नाम हर उस aspect को कवर कर रहा था जो इन 6 साल में हमें अलग अलग लोगो को आपस में जोड़ते हुए हम सीख रहे थे.

2019 से 2020
मैं पर्सनली अरविन्द केजरीवाल से प्रभावित होकर अपनी नौकरी छोड़ के स्वदेश आया था. पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़कर मैंने लोगो की क्या बेसिक जरूरते हैं और उन जरूरतों के रस्ते में क्या क्या अड़चने हैं ये सीखा गली-गली हर एक झुग्गी-झोपडी में जा जाकर.
दिल्ली से लेकर बिहार तक गरीब लोगो की एक ही कॉमन मुसीबत- 
  • राशनकार्ड बनवाने में दलाली घूसखोरी
  • पीने का साफ़ पानी के लिए रोज जंग और जद्दोजहद
  • अच्छी और सस्ती शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों का अभाव
  • अनुमंडल और सदर अस्पताल सिर्फ कागजों और अखबार की खबरों में चमक-दमक, धरातल पर डोक्टरों की गैरहाजिरी दवाईयों की अनुपलब्धता. जरुरी लैब जांच बस कागजों पर है, लोगों को प्राइवेट में कराना पड़ता है.

2020 से 2025 तक-
इन 5 साल में बिहार ने दो विधानसभा चुनाव देख लिया. दो बार राज्य की सरकार बन गयी और आम आदमी आज भी वही बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य और सड़क के लिए लड़ रहा है! 2024 में हमने सड़क और बिजली के लिए पहली बार आंदोलन शुरू किया, तब से लेकर आज भी हर एक कोने हर एक गली में सडकों की वही दुर्दशा है. उल्टा ये दुर्दशा और बढती ही जा रही है- कारण ?

कारण की हम लड़ रहे हैं 01 की रफ़्तार से तो भ्रष्टाचार हो रहा 100 की रफ़्तार से.

रजिस्ट्रेशन की जरुरत-

हम लड़ रहे हैं, मगर रजिस्ट्रेशन हमारी लड़ाई को मजबूती और वैधता प्रदान करता है.

संगठन का रजिस्ट्रेशन: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने की कुंजी

  • कानूनी ताकत और स्थायी पहचान: रजिस्ट्रेशन संगठन को एक स्वतंत्र कानूनी इकाई का दर्जा देता है, जिससे वह अपने नाम से RTI दाखिल कर सके, PIL लड़ सके और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत कानूनी चुनौती दे सके – बिना व्यक्तिगत जोखिम के संगठन की आवाज संस्थागत रूप से गूंजती रहे।
  • सरकारी और सामाजिक मान्यता: रजिस्टर्ड संगठन को आधिकारिक पहचान मिलती है, जिससे सरकारी विभाग, कोर्ट और लोकल अथॉरिटी उसकी शिकायतों और मांगों को गंभीरता से लेते हैं – यह भ्रष्ट तंत्र के सामने एक ठोस संस्था की तरह खड़ा होने की ताकत देता है।
  • लंबी लड़ाई की निरंतरता: अनरजिस्टर्ड रहने पर संगठन व्यक्तिगत नेतृत्व पर निर्भर रहता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन से वह पीढ़ियों तक चलने वाली संस्था बन जाता है – भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को व्यक्तिगत से सामूहिक और स्थायी बनाता है।
  • सदस्यों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा: रजिस्ट्रेशन से संगठन के कार्यकर्ताओं को कानूनी ढाल मिलती है – दबाव, मुकदमे या धमकियों के सामने संस्था का नाम आगे रहता है, जिससे जमीनी स्तर पर बेखौफ काम जारी रह सके।
  • बड़े बदलाव की क्षमता: रजिस्टर्ड संगठन की आवाज ज्यादा दूर तक पहुंचती है – मीडिया, न्यायालय और नीति-निर्माताओं तक – जिससे लोकल भ्रष्टाचार की जड़ों पर गहरा प्रहार संभव हो पाता है, न कि सिर्फ व्यक्तिगत विरोध तक सीमित रहे।

बार-बार बाढ़ के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही पर बाढ़प्रभावित लोगो से चर्चा. लोगों को संगठन की अहमियत का अहसास हुआ
तस्वीर 3: संगठन के रजिस्ट्रेशन की प्रेरणा: जब लगातार हर साल बाढ़ झेलने के बाद भी बाढ़ से पहले व्यवस्था कोई तयारी नहीं करती और संगठन के आवाज को अनसुना कर देती है, तब क़ानूनी रास्ता अख्तियार करना जरुरी हो जाता है. क़ानूनी रस्ते के लिए वैध पहचान हो इसके लिए संगठन को रजिस्ट्रेशन चाहिए.

ये कदम संगठन को सिर्फ एक समूह से एक मजबूत संस्था बनाता है – जो भ्रष्ट सिस्टम को चुनौती देने के लिए जरूरी है।

अब आगे क्या ? यह मीटिंग कोई अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। आने वाले महीनों में संगठन का रजिस्ट्रेशन पूरा कर

  • RTI
  • जनहित याचिका
  • प्रशासनिक जवाबदेही
जैसे औजारों के साथ यह लड़ाई और तेज़ होगी। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं — हर उस आम आदमी की है जिसे सिस्टम ने अब तक अनसुना किया।

✍️ लेखक: मिन्हाज़ भारती — जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने 2019 से बिहार में पानी, सड़क, शिक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है।

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