AAAS बोर्ड मेम्बर्स की मीटिंग: संगठन को धार देने की तैयारी
लम्बी छलांग से पहले एक एक आखिरी बैक-स्टेप!
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| तस्वीर 1: संगठन की कोर कमिटी की फाइनल ड्राफ्टिंग मेम्बर्स की मीटिंग- 18 जनवरी 2026 पटेल स्कूल महेशखूंट के समीप. मीटिंग समाप्ति के बाद की सामूहिक तस्वीर. |
6 साल की ज़मीनी लड़ाई के बाद: क्यों अब आम आदमी अधिकार संगठन को कानूनी पहचान ज़रूरी हो गई
(आम आदमी अधिकार संगठन को मजबूत क़ानूनी धार देने के लिए रजिस्ट्रेशन के मद्देनजर आज मीटिंग की पूरी कहानी.)
जब कोई आम आदमी अकेला लड़ता है, तो व्यवस्था मुस्कुरा देती है।
लेकिन जब वही आम आदमी संगठन बनाकर खड़ा हो जाए — तब व्यवस्था घबराने लगती है।
तो हमने आपस में मिलकर संगठन बनाया. अलग अलग समय अलग-अलग नाम हमने रखा क्योंकि कोई एक स्पष्ट प्रारूप हमारे सामने नहीं था, हम सीख रहे थे.
"आम आदमी अधिकार संगठन".
2019 से 2020
मैं पर्सनली अरविन्द केजरीवाल से प्रभावित होकर अपनी नौकरी छोड़ के स्वदेश आया था. पहले दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़कर मैंने लोगो की क्या बेसिक जरूरते हैं और उन जरूरतों के रस्ते में क्या क्या अड़चने हैं ये सीखा गली-गली हर एक झुग्गी-झोपडी में जा जाकर.दिल्ली से लेकर बिहार तक गरीब लोगो की एक ही कॉमन मुसीबत- - राशनकार्ड बनवाने में दलाली घूसखोरी
- पीने का साफ़ पानी के लिए रोज जंग और जद्दोजहद
- अच्छी और सस्ती शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों का अभाव
- अनुमंडल और सदर अस्पताल सिर्फ कागजों और अखबार की खबरों में चमक-दमक, धरातल पर डोक्टरों की गैरहाजिरी दवाईयों की अनुपलब्धता. जरुरी लैब जांच बस कागजों पर है, लोगों को प्राइवेट में कराना पड़ता है.
2020 से 2025 तक-
इन 5 साल में बिहार ने दो विधानसभा चुनाव देख लिया. दो बार राज्य की सरकार बन गयी और आम आदमी आज भी वही बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य और सड़क के लिए लड़ रहा है! 2024 में हमने सड़क और बिजली के लिए पहली बार आंदोलन शुरू किया, तब से लेकर आज भी हर एक कोने हर एक गली में सडकों की वही दुर्दशा है. उल्टा ये दुर्दशा और बढती ही जा रही है- कारण ?
कारण की हम लड़ रहे हैं 01 की रफ़्तार से तो भ्रष्टाचार हो रहा 100 की रफ़्तार से.रजिस्ट्रेशन की जरुरत-
हम लड़ रहे हैं, मगर रजिस्ट्रेशन हमारी लड़ाई को मजबूती और वैधता प्रदान करता है.
- राशनकार्ड बनवाने में दलाली घूसखोरी
- पीने का साफ़ पानी के लिए रोज जंग और जद्दोजहद
- अच्छी और सस्ती शिक्षा के लिए सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों का अभाव
- अनुमंडल और सदर अस्पताल सिर्फ कागजों और अखबार की खबरों में चमक-दमक, धरातल पर डोक्टरों की गैरहाजिरी दवाईयों की अनुपलब्धता. जरुरी लैब जांच बस कागजों पर है, लोगों को प्राइवेट में कराना पड़ता है.
2020 से 2025 तक-
इन 5 साल में बिहार ने दो विधानसभा चुनाव देख लिया. दो बार राज्य की सरकार बन गयी और आम आदमी आज भी वही बिजली पानी शिक्षा स्वास्थ्य और सड़क के लिए लड़ रहा है! 2024 में हमने सड़क और बिजली के लिए पहली बार आंदोलन शुरू किया, तब से लेकर आज भी हर एक कोने हर एक गली में सडकों की वही दुर्दशा है. उल्टा ये दुर्दशा और बढती ही जा रही है- कारण ?
रजिस्ट्रेशन की जरुरत-
संगठन का रजिस्ट्रेशन: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने की कुंजी
- कानूनी ताकत और स्थायी पहचान: रजिस्ट्रेशन संगठन को एक स्वतंत्र कानूनी इकाई का दर्जा देता है, जिससे वह अपने नाम से RTI दाखिल कर सके, PIL लड़ सके और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत कानूनी चुनौती दे सके – बिना व्यक्तिगत जोखिम के संगठन की आवाज संस्थागत रूप से गूंजती रहे।
- सरकारी और सामाजिक मान्यता: रजिस्टर्ड संगठन को आधिकारिक पहचान मिलती है, जिससे सरकारी विभाग, कोर्ट और लोकल अथॉरिटी उसकी शिकायतों और मांगों को गंभीरता से लेते हैं – यह भ्रष्ट तंत्र के सामने एक ठोस संस्था की तरह खड़ा होने की ताकत देता है।
- लंबी लड़ाई की निरंतरता: अनरजिस्टर्ड रहने पर संगठन व्यक्तिगत नेतृत्व पर निर्भर रहता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन से वह पीढ़ियों तक चलने वाली संस्था बन जाता है – भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष को व्यक्तिगत से सामूहिक और स्थायी बनाता है।
- सदस्यों और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा: रजिस्ट्रेशन से संगठन के कार्यकर्ताओं को कानूनी ढाल मिलती है – दबाव, मुकदमे या धमकियों के सामने संस्था का नाम आगे रहता है, जिससे जमीनी स्तर पर बेखौफ काम जारी रह सके।
- बड़े बदलाव की क्षमता: रजिस्टर्ड संगठन की आवाज ज्यादा दूर तक पहुंचती है – मीडिया, न्यायालय और नीति-निर्माताओं तक – जिससे लोकल भ्रष्टाचार की जड़ों पर गहरा प्रहार संभव हो पाता है, न कि सिर्फ व्यक्तिगत विरोध तक सीमित रहे।
ये कदम संगठन को सिर्फ एक समूह से एक मजबूत संस्था बनाता है – जो भ्रष्ट सिस्टम को चुनौती देने के लिए जरूरी है।
अब आगे क्या ? यह मीटिंग कोई अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। आने वाले महीनों में संगठन का रजिस्ट्रेशन पूरा कर
- RTI
- जनहित याचिका
- प्रशासनिक जवाबदेही
✍️ लेखक: मिन्हाज़ भारती — जमीनी सामाजिक कार्यकर्ता, जिन्होंने 2019 से बिहार में पानी, सड़क, शिक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है।



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