मिन्हाज़ और आम आदमी पार्टी: मेरी राजनैतिक यात्रा -2
"रे मिन्हाज़, इहाँ त उहे जात-पात अउर हिंदूए-मियां पर लोग सब दिना नेता चुनते" 70 साल के मुजीबुर बाबा के मुंह से ये बात सुनकर तो एक बार मैं अन्दर से हिल गया!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025.
5 साल में एक बार ये मौका हाथ आता है हमें अपना मुकद्दर चुनने का. 5 साल में बस एक यही मौका हाथ लगता है जब हमें अपनी तक़दीर को लिखने की ताकत मिलती है, सही से हमने अपना मुकद्दर चुन लिया तो हमारी नस्लें सुधर जाएँगी वरना हम अपनी नस्लों को अंधे कुँए में खुद धकेल देते हैं. सब कुछ निर्भर करता है की वोटिंग के दिन हमारा फैसला क्या होगा ?
मैं किसी राजनितिक पार्टी का गुलाम नहीं हूँ, बल्कि सिद्धांतो और नियत का हूँ. जो भी मेरे दिल को अपने काम और अपने उसूलों से गवाही दे देगा मैं उसको अपना तन-मन-धन दे दूंगा. समाज को उन्नत और अग्रगामी बनाने के मेरे सपने को पुरा करने की तरफ जो भी पार्टी इमानदारी से दिखेगी मिन्हाज़ उसके तरफ खड़ा होकर अपना कंधा दे देगा.
आम आदमी पार्टी मेरा खादिम नहीं है. दिल्ली में मैंने आम लोगो के भलाई और सुकून के लिए इस पार्टी के संघर्ष को देखा है, खुद से जिया है, और सबसे बड़ी बात और खरी-खरी बात की राजनीति में ईमानदारी की एक शुरुआत इस पार्टी ने की तभी मेरे जैसे हजारों युवा अपनी अपनी विदेशों की नौकरी को छोड़ कर भारत वापस लौटे. बिहार की राजनीति में मैं अपना स्टैंड बता देना चाहता हूँ:-
मिन्हाज़ की लाइन और उसकी विचारधारा-
- शिक्षा- जो की सबके लिए एक जैसी हो, गुणवत्ता की हो और सरकार के द्वारा संचालित हो रही हो ताकि सब बच्चों में बिना भेदभाव एक जैसी आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा मिल सके. शिक्षा वैज्ञानिक सोच और विज्ञान आधारित फैक्टर पर हो. हर सरकारी विद्यालय में मिडल क्लास से ही केमिस्ट्री के लैब्स हों, फिजिक्स के लैब्स हों, बायोलॉजी के स्पेशिमेन हों.
- स्वास्थ्य- हर नागरिक को एक समान सुविधा के साथ स्वास्थ्य सुविधा मिले सरकारी अस्पतालों में हर एक नागरिक को ना केवल स्वास्थ्य सेवा मिले बल्कि प्रॉपर सम्मान भी मिले! सम्मान मिलना मेरी सबसे बड़ी लड़ाई है इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है ये बात इस मिन्हाज़ को बहुत विचलित करती है!
डॉक्टर हो या कोई भी अन्य कर्मचारी वो सामने खड़े रोगी को उसके कपडे या स्थिति को देखकर तू-तड़ाक या आप करता है. क्या ये वही बराबरी की स्थिति है जो संविधान लिखते वक्त बाबा साहेब आंबेडकर ने सोचा था या पूज्य गांधी बापू ने आखिरी सांस लेते वक़्त भविष्य के भारत के बारे में विचार किया होगा ? - भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था- गाँव वापस आकर व्यवस्था से आमना सामना होने पर मुझे पता चला की यहाँ तो कदम-कदम पर करप्शन का बोलबाला है. हर एक छोटी सी छोटी जरुरत, जो की हर एक आदमी का निशुल्क अधिकार है, उस मुफ्त अधिकार के लिए भी लोगों को घुस देना पड़ रहा है. यानी लड़ाई इतनी कठिन है की हर कदम पर हमें भ्रष्टाचार के दीवार से टकराना है!
एक आम आदमी इस दीवार से एक हद तक ही टकरा सकता है, हमारे झेलने के सीमा होती है. एक सीमा के बाद हम नहीं लड़ सकते. मगर मैं खुशनसीब हूँ की मैं इससे लड़ सकता हूँ, मेरे भाई, मेरी बहनें, मेरी बीबी मेरे लिए कमजोरी नहीं बल्कि मेरा कंधा बन खड़े हैं, कोई सवाल नहीं, बिना किसी जबाब के मुझे आर्थिक, मानसिक और मोरल सपोर्ट मेरे परिवार से मिलना मेरी सबसे बड़ी ताकत हो जाती है इससे लड़ने में.
इसमें लोगो को तय करना होगा की-
- क्या हमारे बच्चों को एक बेहतर शिक्षा का इन्फ्रास्ट्रक्चर बिहार में मिल गया है ?
- क्या हमारे परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर हम इस बात से बेफिक्र रह सकते हैं की हां इलाज हमारे सामर्थ्य से बाहर होने के बाद भी हमें सोचना नहीं पड़ेगा क्योंकि सरकारी अस्पताल में मुकम्मल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध है ?
- सांप के काटने से कई लोगों की मौत हो जाती है! (Healthcare/snakebite system failure)
सर्पदंश लाइजाज नहीं है, इसके बावजूद भी सेकड़ों लोगों का बिहार में सांप के काटे से मर जाना ये बताता है की व्यवस्था में बहुत बड़ी खामी है जो सर्पदंश का इलाज होने के बाद भी लोगों तक समय रहते नहीं पहुँच पा रहा जिसके कारण लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जा रहे! क्या इसके लिए ग्रामीण सड़क-व्यवस्था की जर्जर हालत पर नेताओं को डर लगना शुरू होगा की ये जनता उनको उखाड़ फेकेगी ?
- पोस्टमैन गाँव में चिट्ठी, दस्तावेज देने के लिए घुस लेता है, डीलर राशन देने के लिए घुस लेता है और वाजिब देने के बजाय अपना कट मारता है, ब्लॉक में राशन कार्ड के लिए और तमाम दस्तावेज बनवाने के लिए दलालों को सेकड़ो हजारों रूपये देने पड़ते हैं जो की एकदम फ्री हैं नियमतः, एक मैं आवाज उठाता हूँ तो मेरे पहुँचने पर ये सब कारगुजारी करने वाले कुछ देर के लिए सिमट जाते हैं लेकिन ये कोई समस्या का हल तो नहीं है ? (Corruption in documentation/ration)
डाकिया द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार पर हमने बड़ी लड़ाई लड़ी, ट्विटर से लेकर जमीन तक, इस लिंक पर हमारी लड़ाई देखिये👇
https://x.com/sangathan/status/1945375185416393044?s=20
मेरी राजनीतिक चेतना की यह यात्रा भाग-1 से आगे बढ़ती है, जहाँ सिद्धांत ज़मीन पर उतरते हैं (भाग-1 यहाँ क्लिक करके पढ़ें)
तब तक के लिए-

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