आजादी के 70 साल बाद भी बिजली पानी सड़क के लिए ही लड़ते रहेंगे ? #MinhazAsks

आजादी  के 78 साल बाद भी हम किस चीज के लिए लड़ रहे हैं ? बिजली, पानी और सड़क !! जहर खाकर मर क्यूँ नही जाते हो रे नेताओं हरामखोरों !

तस्वीर 1: जुलाई 2024 की तस्वीर जिसमें मिन्हाज़ बिजली-सड़क के लिए धरना-प्रदर्शन से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए दिख रहे हैं.

जुलाई 2024. 

मुझे- "मैं मिन्हाज़" MNC की लग्ज़री नौकरी छोड़ अपने गाँव लौटा, जिसे मेरे अब्बू अपने सभी बच्चो सहित मेरे बचपन में ही छोड़ बाहर चले गए थे अपने बच्चों को पालने की मज़बूरी में, वो बच्चा मिन्हाज़ 35 साल की कच्ची जवानी में देश दुनिया देख अपने गाँव लौट आया था की अपने जीवन के अनुभवों को गाँव में बिखेर गाँव को आगे ले जाने की कोशिश करेगा. लेकिन यहाँ तो आगे क्या बढ़ना बेसिक आवश्यकता भी सही से मुहैया नहीं.

और जिसकी जिम्मेदारी बनती है, वो जिम्मेदार लोग मस्ती से घुस खा-खाकर अपनी पुश्तों को चर्बी चढ़ा रहे.

क्या है बेसिक जरूरते?
सड़क, पानी, बिजली स्वास्थ्य और शिक्षा ही न ?

इसमें भी एकदम आवश्यक जिंदगी जीने के लिए सड़क पानी और बिजली तो चाहिए ही न ? 

ना गाँव में पीने का साफ़ पानी उपलब्ध. ना बिजली उपलब्ध. और जब बिजली हो भी तो आंखमिचौली का खेल. और सड़क? सड़क तो माशाल्लाह पूछो ही मत!

आज 2025 के आखिरी कगार पर हम खड़े हैं, गाँव लौटे हुए मुझे 5 साल से भी अधिक हो चूका है. दसियों बार मैं अधिकारीयों, नेताओं को मेसेज और पात्र लिख चूका हूँ. दसियों बार अलग अलग संगठन के बैनर तले लोग धरना प्रदर्शन कर चुके हैं. लेकिन इस गाँव (बोरना) को जोड़ने वाली सड़के ऐसी हैं मानों साक्षात यमराज ने ही ठेकेदारों को कॉन्ट्रैक्ट दिया हो !

मुखिया-बोरना जो की एक ही परिवार इस गाँव के मुखिया की कुर्सी पर जाने कितने साल से बना हुआ है, एक पल को मैं मान सकता हूँ की मुखिया को कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके घर में इन्वेर्टर जेनेरटर सब कुछ है. बिजली गयी तो इन्वेर्टर चला लिया जनरेटर चला लिया. सड़क जर्जर है बीसियों साल से सड़क ऐसा है मानो सड़क के दोनो तरफ खुद यमराज बैठे हुए हो, ऐसे में तो यही मानता हूँ मैं की यमराज ने किसी और को नहीं बल्कि खुद बोरना गाँव के मुखिया को ही ठेकेदारी दे रखी है. क्या ऐसा हो सकता है की बीसियों साल से मुखिया एक ही घर के लोग बने रहे और सड़क भी बीसियों साल से एक ही खतरनाक जर्जर बदहाल बना रहे ?

ठीक है लोगो को आदत पड़ गयी है ऐसे भेड़-बकरी की तरह रहते रहते, लेकिन मिन्हाज़ तो ऐसे जानवरों की तरह रहने अपनी नौकरी वोकरी छोड़ गाँव नहीं लौटा था! लोग अगर चुप हैं उनको ऐसे ही रहने की लत लग गयी है तो ठीक, मैं अकेले ही भीडूंगा इस सिस्टम से.

यही ठानकर मैंने जुलाई 2024 में सम्बंधित अधिकारियों के साथ पत्राचार तेज कर दिया और सड़क और बिजली, पहले इन दो मुद्दों के साथ सिस्टम पर हमला करने की तैयारी की. और 7 जुलाई को हमने आम आदमी अधिकार संगठन के बैनर तले मीडिया को बुलाकर अपने प्रोटेस्ट सह धरना की जानकारी देने के लिए गोगरी प्रखंड के अलग अलग पंचायत में जाकर लोगो के सामने अपनी बात रखी,  ये आंदोलन क्यों शुरू किया जा रहा है इसकी क्या वजहें हैं-

"इस धरने के पीछे सबसे बड़ा रीजन यह है कि बिजली की समस्या। बिजली कई बार पूरे दिन नहीं आती है. और कभी आती भी है तो पाँच मिनट, दस मिनट के लिए आती है और चली जाती है। जो भी ऑफिसर हैं, जेई, एई, या एग्जिक्यूटिव इंजीनियर, वो लोग फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं। और मेन प्रॉब्लम यह हो रही है कि जो भी हमारे पेड़ हैं, वो पेड़ की छँटाई टाइम पर नहीं करते हैं।

बिजली का हमारा सबसे बड़ा मुद्दा है। उसके अलावा जो हमारा 11,000 वोल्ट का लाइन है, वो नंगी वायर है। हम चाहते हैं कि उसको केबल के फॉर्म में बदला जाए ताकि पेड़-पेड़ टच होने के बाद भी लाइट न जाए। 

दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा हमारा है जमींदारी बांध। अगर जमींदारी बांध को थोड़ा सा उँचा कर दिया जाए और उसमें स्लूइस गेट लगा दिया जाए तो कुछ दिनों तक पानी रोका जा सकता है। हम 15 दिन तक यहाँ बाढ़ में फँसे रहते हैं, अगर हम चाहें तो उसको 3 दिन में कन्वर्ट कर सकते हैं। इसके अलावा बिजली हो गया, जलनल योजना में भी कई जगहों पर रोड तोड़ के छोड़ दिया गया है, एक जलमिनार बनाया गया है लेकिन अभी तक पानी वहाँ से रिलीज नहीं किया गया है।

तस्वीर 2: सड़क और बिजली इन दो मुद्दों को प्राइम रखते हुए प्रदर्शन की भूमिका पर बात रखते हुए मिन्हाज़ भारती

ये तीन बड़े मुद्दे हैं। उसके अलावा राशन कार्ड में घुसखोरी चल रही है, इंदिरा आवास में घुसखोरी चल रही है, शौचालय में ढाई हजार रुपए लिया जा रहा है और फिर भी शौचालय नहीं बन रहा है।

मीडिया- मिन्हाज़ जी एक मुद्दा आपका और भी था जो कुछ दिन पहले सीओ के खिलाफ आपलोग आवाज उठा रहे थे, अतिक्रमण को लेकर के गोबरी जीरो और जमींदारी बांध, और नवटोलिया का?

मिन्हाज़- उस मुद्दे पर हम लोग अतिक्रमण के मुद्दे पर सीओ के पास भी गए, फिर अनुमंडल के पीजीआरओ ऑफिसर, कमिश्नरी भी गए, लेकिन ये लोग एक-दूसरे को लेटर देते हैं, नीचे अपने सबॉर्डिनेट्स को ऑर्डर देते हैं कि आप काम कीजिए लेकिन वो काम नहीं कर रहे। यह सबसे बड़ा मुद्दा है। इतने एक साल से हम अतिक्रमण के मुद्दे पर लगे हुए हैं, इस पर हम बड़ी मज़बूती से आवाज उठाएंगे।

 ये स्टोरी जारी है अगले भाग में. पार्ट-2  पढने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://blog.minhazbharti.com/2025/11/2024-one-day-protest-story-part-2.html

तस्वीर 3: फंडामेंटल नीड्स के लिए जनांदोलन को मिला विशाल समर्थन की एक छोटी झलक

विडियो देखें-

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