डिजिटल इंडिया की हकीकत: सरपंच नवल किशोर सिंह का डोमेन होल्ड – NIXI की लापरवाही से आवाज दब रही है
दोस्तों, कभी सोचा है कि डिजिटल इंडिया का नारा लगाते हुए सरकार कितनी आसानी से आम आदमी की आवाज दबा देती है? मैं खुद गांव में रहता हूं, जहां इंटरनेट की स्पीड से ज्यादा समस्या ये है कि एक छोटी सी देरी से पूरी वेबसाइट बंद हो जाती है। आज मैं आपको बताने जा रहा हूं हमारे साथी नवल किशोर सिंह जी की कहानी – बिहार के खगड़िया जिले के बोरना पंचायत के सरपंच और AAP के जिला महासचिव। उनका डोमेन nksingh.in 3 दिनों से NIXI द्वारा "Server Hold" पर पड़ा है, और ये कोई छोटी बात नहीं है। ये तो जैसे ग्रामीण एक्टिविज्म की रीढ़ तोड़ने की साजिश लगती है।
नवल जी के साथ क्या हुआ? एक ईमानदार सरपंच की लड़ाई
26 फरवरी 2026 को नवल जी ने X पर अपना थ्रेड शेयर किया (यहां देखें)। उन्होंने बताया कि उनका .in डोमेन होल्ड पर है, सिर्फ Aadhaar KYC वेरिफिकेशन की देरी से। नवल जी ने सबकुछ किया – GoDaddy से WHOIS अपडेट, info@nixi.in पर ईमेल (टिकट: NIXI/2002261844018440)। लेकिन होल्ड नहीं हटा। GoDaddy ने हाथ खड़े कर दिए, कहा कि नियम NIXI के हैं, हम कुछ नहीं कर सकते।
सोचिए जरा, नवल जी जैसे आदमी, जो सड़क घोटाले रोकने के लिए कैमरे लेकर मैदान में उतरते हैं, AAAS आंदोलन चलाते हैं, गांव की समस्याएं उठाते हैं – उनकी साइट डाउन हो गई। ये साइट उनकी आवाज थी, पब्लिक इंफो शेयर करने का माध्यम। अब ये बंद है, तो कितने लोगों की आवाज दब गई? ये डिजिटल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है, और बिहार जैसे इलाकों में जहां पहले से ही आवाज पहुंचाना मुश्किल है, ये और भी गंभीर हो जाता है।
NIXI और GoDaddy की लापरवाही – ये डिजिटल इंडिया है?
NIXI, जो MeitY के अधीन है, .in डोमेन मैनेज करती है। 2022 से KYC नियम सख्त हैं, अच्छी बात है, लेकिन प्रक्रिया इतनी पुरानी और धीमी क्यों? मैनुअल रिव्यू में 7-10 दिन लगते हैं, जबकि दुनिया डिजिटल हो गई है। GoDaddy जैसे प्लेटफॉर्म बस अपडेट फॉरवर्ड करते हैं, लेकिन असल में यूजर बीच में फंस जाता है।
ये समस्या सिर्फ नवल जी की नहीं – लाखों ब्लॉगर्स, छोटे बिजनेस, एक्टिविस्ट्स इससे जूझते हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट एक्सेस पहले से कम है, ऊपर से ये होल्ड। ये आवाज दबाने का तरीका लगता है, जहां ईमानदार लोग सिस्टम से हार जाते हैं। मैं खुद सोचता हूं, अगर नवल जी जैसा आदमी, जो सड़क पर उतरकर लड़ता है, उसकी आवाज रुक जाए, तो आम आदमी का क्या होगा?
समाधान क्या है? हम क्या कर सकते हैं
ये लड़ाई रुकनी नहीं चाहिए। अगर आपका डोमेन होल्ड पर है, तो:
- Aadhaar से KYC अपडेट करें, रजिस्ट्रार से शुरू करें।
- NIXI को ईमेल करें (support@nixi.in), टिकट फॉलो करें।
- RTI दाखिल करें – MeitY से पूछें कि कितने केस पेंडिंग हैं और क्यों?
- अगर जरूरी, .com जैसे अल्टरनेटिव पर शिफ्ट करें।
- सोशल मीडिया पर आवाज उठाएं – #NIXIHold जैसे हैशटैग से प्रेशर बनाएं।
ये स्टेप्स आसान लगते हैं, लेकिन नवल जी जैसे लोगों के लिए ये रोज की लड़ाई है।
मेरी अपील: नवल जी की आवाज को मजबूत बनाएं
नवल किशोर सिंह जी, आप अकेले नहीं हैं। आप बिहार के उन लाखों युवाओं की मिसाल हैं जो सिस्टम से लड़ते हैं। उनका थ्रेड शेयर करें, अपनी कहानी बताएं। अगर हम साथ आएं, तो NIXI और सरकार को जवाब देना पड़ेगा। ये डिजिटल अधिकारों की लड़ाई है – इसमें शामिल हों।
जय हिंद! जय बिहार!
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