असली देशभक्ति क्या है? बन्नी पंचायत में मिन्हाज़ भारती और 'आम आदमी अधिकार' की एक जमीनी पहल
15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस। अमूमन हम इस दिन झंडा फहराकर और देशभक्ति के नारे लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। लेकिन क्या यह असली देशभक्ति है? मयंक मयूर (मयंक पोद्दार) जी से अभी हाल ही में कुछ महीने पहले मैं मिला, "हम मिलते गए और कारवाँ बनता गया" के तर्ज पर मयंक जी ऐसे नायाब हीरे हैं जो अपनी कमाल की स्ट्रेटेजी से आइडियाज से हमलोगों को धारदार जमीनी काम करने के लिए रोडमैप मिलता जाता है. हम सबने यानी 'आम आदमी अधिकार संगठन' की टीम ने इस साल स्वतंत्रता दिवस को एक अलग और अर्थपूर्ण तरीके से मनाने का फैसला किया।
![]() |
| बन्नी पंचायत की दलित बस्ती में बच्चों के बीच मैं मिन्हाज़! और हमारी aaas की टीम |
![]() |
| आजादी के दिन का महत्त्व और इन बच्चों के जीवन में आजादी का क्या मतलब है, बच्चों को ये समझाते हुए हमारे साथी |
जमीनी देशभक्ति का उदाहरण: बन्नी पंचायत का दौरा स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर टीम ने बिहार की बन्नी पंचायत स्थित दलित बस्ती का दौरा किया। यहाँ केवल प्रतीकात्मक उत्सव नहीं मनाया गया, बल्कि बच्चों के बीच कॉपी, कलम और टॉफी का वितरण किया गया। शिक्षा के इन छोटे-छोटे संसाधनों के माध्यम से बच्चों के भविष्य की नींव को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
![]() |
| हमारी बातों को तल्लीनता से सुनते सभी बच्चे |
![]() |
| दिलेर ज़हीर आलम और रामपुर पंचायत के मुखिया बच्चों को स्टेशनरी और टॉफ़ी बांटते हुए. |
देशभक्ति की नई परिभाषा इस पहल का उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि देशभक्ति सिर्फ नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली देशभक्ति का अर्थ है:
अपने पड़ोसी से निस्वार्थ प्रेम करना।
एक-दूसरे के काम आना और समाज को जोड़ना।
सभी धर्मों का सम्मान करना और नफरत को मिटाना।
देश के वंचित तबके की सेवा करना।
मयंक पोद्दार की दृष्टि (The Photographer's Lens) इन तस्वीरों को खुद मयंक जी ने अपने कैमरे में कैद किया है। ये तस्वीरें सिर्फ एक आयोजन की गवाह नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि कैसे 'आम आदमी अधिकार' संगठन संविधान के मूल्यों (जय भारत, जय संविधान) को जमीन पर उतारने का काम कर रहा है।




Comments
Post a Comment