बाबा साहेब और बापू के विचारों की हत्या कबतक? गरीब जनता और भ्रष्टाचारी मुखिया!

जब मैं पूरी तरह अपने दिलोंदिमाग को convince कर 2019 में कुवैत-दिल्ली छोड़ बिहार के छोटे से गाँव, अपनी जन्मभूमि बोरना लौटा जमीनी स्तर पर उन विचारों की कब्र देखी जो गांधी बापू और बाबा साहब आंबेडकर ने भारत को एक राष्ट्र के तौर पर बुनियाद डालते समय देखी थी.

संविधान बचाओ आंदोलन के दौरान युवाओं के साथ गोगरी अनुमंडल में मिन्हाज़ भारती, फरवरी 2020
मैं भी बोलूं तुम भी बोलो, संविधान बचाओ देश बचाओ : फरवरी 2020 गोगरी अनुमंडल में युवाओं के साथ संविधान बचाने की अलख जगाता मिन्हाज़ भारती.

क्या findings और observations थे मेरे ?

ये सिर्फ गाँव ही नहीं बल्कि हर जगह की कॉमन इशू थी की हर एक बेसिक बुनियादी सरकारी योजना हर स्तर पर भ्रष्टाचार के बोझ से दबी हुई थी. गरीब से गरीब आदमी को 100 रूपये के सरकारी खर्च के लिए भी 20 से 25 रूपये घुस देना, ये मजबुरी नहीं बल्कि इंसानियत के प्रति अपराध है, ऐसा मेरा पूरी गंभीरता से मानना है. और ये अपराध हर रोज मेरे आँखों के सामने मेरे चारो तरफ हो रहा था.
क्या गांधी बापू ने इसी रामराज्य और पंचायती राज का सपना देखा था ??

लड़ना तो पड़ेगा किसी न किसी को !

देखिये एक सिस्टम है अपने बिहार में जिसका नाम है आरटीपीएस (RTPS), जिसका मतलब है Right To Public Services- लोक सेवा का अधिकार, जिसके जरिये लोग अपनी जाती, आय, निवास, पेंशन जैसे आवश्यक प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन देकर बनवा सकते हैं. सरकार ने हर पंचायत में RTPS काउंटर खुलवाया है ताकि लोगों को इधर उधर तहसील या अंचल का चक्कर ना काटना पड़े और ना दलालों के फेर में पड़ना पड़े.

लेकिन हाल देखिये की ये काउंटर या तो बंद मिलेंगे, या ऑपरेटर मौजूद नहीं होंगे, या फिर RTPS काउंटर के लिए जरुरी उपकरण नहीं मौजूद होंगे.

इसकी जिम्मेदारी सीधे मुखिया की होती है. बोरना में मुखिया यस्मिन जी पिछले 9 साल से मुखिया की कुर्सी पर बनी हुई हैं, इसके पहले भी मुखिया की कुर्सी इसी परिवार के सदस्य के पास बनी हुई थी. कुव्यवस्था और भ्रष्टाचार का आलम क्या है ये देखते तो सभी हैं, मैंने इसकी ग्राउंड तहकीकात की, एकबार पहले इस विडियो को देखिये-

विडियो रिकॉर्डिंग की तारीख- 30 जुलाई 2024, स्थान- RTPS काउंटर बोरना पंचायत.

अब इस विडियो को ध्यान से देखने के बाद आप ये नतीजा पाएंगे की-
  1. बोरना पंचायत भवन में RTPS काउण्टर तो है लेकिन प्रिंटर नहीं है.
  2. बिना प्रिंटर के फ़ॉर्म apply करने पर recieving कैसे दिया जायेगा?
  3. पता चला की प्रिंटर मुखिया जी के दरवाज़े है!
  4. प्रिंटर वहाँ रखने का अधिकार किसने दिया?
  5. किस अधिकार से मुखिया ने पंचायत भवन rtps counter का प्रिंटर अपने घर पर रखा?
  6. बोरना की जनता राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिये, जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिये परेशान है और हमारी मुखिया जी प्रिंटर दबा कर बैठे हैं!!
  7. RTPS खुलने के बाद भी मुखिया का दलाल जन्म प्रमाण पत्र का 2000 रुपया माँगता है जबकि ये काम फ़्री में होता है.
जबकि होना तो ये चाहिए था की मुखिया जी खुद जनता को विडियो के माध्यम से जानकारी देती की जन्म प्रमाण पत्र फ़्री में बनाया जाता है । किसी दलाल को पैसे ना दें ।
लेकिन, उन्होंने जब खुद दलालों को गाँव में नियुक्त कर रखा हो पैसे उगाही के लिए तो आप भला किससे व्यवस्था दुरुस्त करने की उम्मीद रखेंगे ?
सुनिए मुखिया यास्मिन जी- मैं मिन्हाज़ आपसे सवाल करता हूँ आप राजनीति में क्या लोगों को लूटने के मकसद से आये थे या उनकी जिंदगी आसान करने के लिए आये थे ? छोडिये रिश्वतखोरी का धंधा. कहा जाता है की यूं तो रिश्वत से घर भर जाता है मगर दुआओं में असर ज्यादा है!
बोरना का इतिहास आपको किस तरह से याद करेगा आप ही बताइए- रिश्वतखोर या इमानदार!
क़यामत में हश्र के दिन क्या जवाब दीजियेगा मुखिया जी ?
बिहार के ग्रामीण इलाके में गली-कूचों के बीच गरीब परिवारों के साथ बातचीत करते मिन्हाज़ भारती
गली कुचो में उतर कर देखो तो तंगी-गरीबी और पिछड़ापन मिलेगा. सवाल यह है, यह खाई कब मिटेगी?
याद कीजिये जैसा की मैंने ऊपर लिखा एक जगह- "गरीब आदमी को अपने सौ रूपये के काम के लिए 25 से 50 रूपये घुस देना पड़ जाये तो ये गुनाह-ए-कबीरा है !"

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