एक आम युवा से सामाजिक कार्यकर्त्ता तक मेरी यात्रा. मैं मिन्हाज़ !
मिन्हाज़ की कशमकश !
मैं मिन्हाज़, जब 2019 में अपनी डेढ़ लाख रूपये महीने की कुवैत की नौकरी को छोड़ कर अपने स्वदेश, अपने गाँव लौटने और अपनी मिट्टी के लिए कुछ करू, इस कशमकश से लड़ रहा था, दिल में एक बैचेनी थी की ठीक ठाक स्टेबल हेंडसम सैलरी के साथ जिंदगी के साथ आगे बढूँ या देश लौट कर गाँव पहुँच गाँव में लोगो की छोटी छोटी समस्याओं के लिए सिस्टम से लड़ भिडू ?


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