बिजली-सड़क की लड़ाई का मीडिया कवरेज: बुनियादी अधिकारों की लड़ाई भाग 4
अब तक मैं मिन्हाज़, इस आंदोलन की कहानी 3 हिस्सों में बता चूका हूँ, अब यहाँ 4थे हिस्से में मुझे लगता है उस आंदोलन की मीडिया में कैसे कवरेज हुई इसका जिक्र करना सही रहेगा ताकि बातें हवा-हवाई ना लगकर ये दिखे की - हाँ, युवाओं ने बिना किसी राजनीतिक ताकत के वो लड़ाई लड़ने का जिम्मा उठाया जिसमे लड़ाई जैसा कुछ ना था अगर हमारे हुक्मरान इमानदारी से जनता के बुनियादी सुविधा, देश के मुलभुत स्ट्रक्चर के लिए अपना कुल ताकत का 10 फीसदी भी खर्च कर डालते.
2. दैनिक जागरण ने 16 जुलाई को खबर प्रकाशित कर जनता तक ये जानकारी पहुंचाने में मदद की कि ये भ्रष्ट व्यवस्था लातों के भुत हैं जिन्हें हर रोज लात की आदत है जिसके बगैर ये काम नहीं करने वाले. हमारे पहले चरण के आंदोलन में अधिकारियों ने मात्र हफ्ते भर में सारी शिकायत दूर कर देने का आश्वासन देते हुए हमें अपना आंदोलन को रोकने के लिए निवेदन किया था. लिखित आश्वासन मिलने पर हमने अपना आंदोलन 3 दिन के बाद रोका. 10 दिन पश्चात् भी कोई करवाई ना होते देख आंदोलन के अगले चरण पर हमारी क्या योजना होगी, इसपर जागरण ने कवरेज किया.
अब तक इस कहानी के:
तीनो भाग में विस्तार से आंदोलन का पूरा timeline मैंने लिखा है. अब मैं मीडिया में आई खबरों की कटिंग या स्क्रीनशॉट साझा कर रहा हूँ-
1. दैनिक भास्कर ने शुरू से आस संगठन के पुरे आन्दोलन को कवरेज दिया, जिससे हमें अपने क्षेत्र के लोगों तक ये अवेयरनेस पहुंचाने में मदद मिली की कैसे ये धरना सह आन्दोलन अब जरुरी हो गया है अधिकारीयों के कान में ये आवाज पहुंचाने के लिए की गोगरी प्रखंड के युवा उनका ये निजामशाही अब और नहीं झेलने वाले हैं.
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| तस्वीर 1: धरना-प्रदर्शन के बाबत क्षेत्र की आम जनता को सूचना देने की खबर को दैनिक भास्कर ने अपने खगड़िया एडिशन में प्रकाशित किया. खबर की कटिंग. |
2. दैनिक जागरण ने 16 जुलाई को खबर प्रकाशित कर जनता तक ये जानकारी पहुंचाने में मदद की कि ये भ्रष्ट व्यवस्था लातों के भुत हैं जिन्हें हर रोज लात की आदत है जिसके बगैर ये काम नहीं करने वाले. हमारे पहले चरण के आंदोलन में अधिकारियों ने मात्र हफ्ते भर में सारी शिकायत दूर कर देने का आश्वासन देते हुए हमें अपना आंदोलन को रोकने के लिए निवेदन किया था. लिखित आश्वासन मिलने पर हमने अपना आंदोलन 3 दिन के बाद रोका. 10 दिन पश्चात् भी कोई करवाई ना होते देख आंदोलन के अगले चरण पर हमारी क्या योजना होगी, इसपर जागरण ने कवरेज किया.
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| तस्वीर 2: दैनिक जागरण आरंभिक आन्दोलन के बाद अगले आन्दोलन के प्रारूप की खुली चर्चा की कवरेज को खगड़िया एडिशन में छापा. दिनांक 16 जुलाई 2024. |


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